ब्रेकिंग
छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय होगा मानसून, 11 सितंबर से बारिश का अलर्ट; बिलासपुर में सामान्य से अधिक बारि... फ्लाइट बंद होने के बीच राहत की खबर, बिलासपुर से Fly91 भर सकती है उड़ान भिलाई में भीषण सड़क हादसा, पेड़ से टकराई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो; दो युवकों की मौत लखनऊ में पत्रकार सुरक्षा सेवा समिति का पहला स्थापना दिवस, 17 राज्यों के पत्रकारों ने दिखाया एकजुटता ... CG News:- लूट के माल के बंटवारे पर गैंग में घमासान! मारपीट ने खोला पूरा राज, रीवा से आई पिस्टल से लू... छत्तीसगढ़ में फिर बिगड़ा मौसम, रायपुर-बिलासपुर समेत कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्य का सम्मान, छत्तीसगढ़ के 64 शिक्षकों को राज्यपाल करेंगे सम्मानित दर्दनाक सड़क हादसा, पेड़ से टकराई बाइक; दो नाबालिगों की मौके पर मौत कर्ज वसूली के नाम पर बर्बरता, महिला और बेटे को बंधक बनाकर पीटा; निर्वस्त्र कर वीडियो बनाने का आरोप नर्मदा में 15 लोगों की जान पर बनी! पेट्रोलिंग बोट का इंजन बंद, तेज बहाव में डूबी नाव
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में जूट की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी

रायपुर | छत्तीसगढ़ में जूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु विगत दिवस इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण सह वैज्ञानिक किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया।

यह प्रशिक्षण छत्तीसगढ़ में जूट की उन्नत खेती और उत्पादन विधियों पर आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण जूट की खेती परियोजना के तहत आईबीआईटीएफ द्वारा वित्त पोषित और आईआईटी भिलाई के सहयोग से आयोजित किया गया।

इस प्रशिक्षण में राष्ट्रीय जूट बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. नीलेन्दु भौमिक और तकनीकी सहायक ने जूट से यांत्रिक फाइबर निष्कर्षण पर व्याख्यान दिया है। उन्होंने बारीक निष्कर्षण को आसान बनाने के लिए एक रिबनर मशीन का प्रदर्शन किया है। आईआईटी भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान संचालक डॉ. विवेक त्रिपाठी ने प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया।

डॉ. राजीव प्रकाश ने रेशेदार फसलों के पारिस्थितिक महत्व के बारे में जानकारी देते हुए किसानों को संबोधित किया। उन्होंने रेशे की गुणवत्ता पर रेटिंग प्रक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों से छत्तीसगढ़ में पूर्व की तरह जूट की खेती फिर से शुरू करने का आह्वान किया।

डॉ. विवेक त्रिपाठी ने किसानों से खरीफ के लिए चावल के अलावा अन्य विकल्पों पर विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि किसान खरीफ में चावल उगाने से पहले ग्रीष्मकालीन फसल के रूप में जूट की खेती कर सकते हैं। इससे किसानों को पारिश्रमिक मिलेगा और उनकी आजीविका में सुधार होगा।

जूट परियोजना की सह अन्वेषक डॉ. प्रज्ञा पांडे ने जूट की उन्नत खेती की पद्धतियों पर व्याख्यान दिया। डॉ. अरुण उपाध्याय ने एंजाइमेटिक रेटिंग तकनीक पर व्याख्यान दिया। इस सम्मेलन में धमतरी और रायपुर के 30 किसानों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और व्याख्यान, मशीन प्रदर्शन और जूट के अवलोकन के माध्यम से जूट उत्पादन के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इस खरीफ मौसम में धमतरी जिले में 4 एकड़ भूमि पर जूट की खेती चल रही है। किसानों ने आगामी वर्ष में जूट का क्षेत्र विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button